April 01, 2010

बहुत दुख हुआ !!!!!!!!!!!!!!!!!

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आज मैने कुछ ऐसे टाईटल युक्त ब्लोगों को पड़ा जिनका टाईटल पड़ कर अनायास ही उनकॊ देखने का दिल करता है , हालाकि मै बहुत ही कम लेख पड़ता हु॒ ,



बहुत दुख हुआ , बहुत ही ज्यादा दुख हुआ, अपनी ही धरा पर अपनी ही धरा की बेईज्ज्ती और अपनी ही संस्कृति की खिल्ली उड़ते हुए मैने इस बलोग पर देखी है ???????


पहले तो ऎसे ब्लोग नही थे ? अब कहां से आ गये ? कुछ गिने चुने लोग अपने स्वं के धर्म को बड़ा बताते हुए भारतीय संस्कृति का मजाक उड़ा रहे है ।वह भारतीय संस्कृति जो अनेक धर्मो की जननी है , उस जननी की वो लोग खिल्ली उड़ा रहे है ? अचरज होता है मुझे !!!! और अपनी ही संस्कृति का मजाक देखेने के लिये हम स्वयं इस तरह के ब्लोग पर जाकर उनके होसले को और बड़ा रहे है ???



सचमुच आज मै बहुत ही दुखी हुँ ।


अपने ही देश मे बेगानो की तरह रहना पड़ रहा है !!!!

June 01, 2009

खुजली और समाधान

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कल शाम टहल रही थी। हवा काफी तेज थी पर तेज हवा मे टहलने का भी अपना आनन्द होता है.. आगे बढ़ी तो चुन्नी अपने घर से दौड़ती भागती चली आ रही थी। आते ही तुरन्त आके गले लगने लगी, मैने पुछा चुन्नी क्या बात है? इस खुशी का राज़ तो बताओ, तो वह बोली कि "आप"... (यूँ तो मुझे इस बात की खुशफहमी पालने की आदत पड़ गयी है :)... ) फिर भी मैने पुछा वो कैसे? तो उसने जवाब दिया आपने जो उपाय बताया था ना खुजली के लिये वो काम आ गया और गर्मी मे भी मुझे खुजली नही हूई ना दवाईयाँ खानी पड़ी ना रात को मम्मी को और मुझे जागना पड़ा... यह हुई ना सबसे ज्यादा खुशी की बात, यह सब कुछ आपके कारण हुआ तो आखिर मे खुशी की वजह भी आप ही हैं...।
उसकी बात सुनकर मै भी मुस्कुरा्ये बिना नही रह सकी। हाँ सच मे यह तो अत्यंत खुशी की बात है चुन्नी... फिर खिलाओ मिठाई। धत्त दीदी रोज मुझे कड़वे एलोवेरा के गुदा का रस पीना पड़ता है और आप मिठाई खाओगी? चलो आपको एलोवेरा ही पिलाती हूँ। चुन्नी ने चुटकी ले ली। नही नही मुझे तो अभी मिठाई ही खानी है मै भी भोर सलोने एलोवेरा पीती हूँ दिन मे तो मिठाई ही चाहिये... और हमारी बात कुछ देर चलती रही

चुन्नी की तो अलग बात है... पर चुन्नी की तरह कई बच्चे,बड़े भी गर्मी के दिनो मे अपनी सेन्सटिव स्किन के कारण किसी न किसी प्रकार की खुजली से परेशान रहते हैं। जितनी साधारण परेशानी यह लगती उतनी है नही, जो इसका भुक्तभोगी है वो तो यही कहता है "हे भगवान यह गर्मी क्यों आती है" अगर आप या आपके अपनो मे से कोई इसका भुक्तभोगी है तो आप इस दर्द को समझ सकते हैं।
पर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नही है, मै बताती हूँ कुछ सामान्य उपाय जिससे आप इस परेशानी से बच सकते हैं।

१. सबसे पहला काम, एकदम सौम्य साबुन का ही इस्तेमाल करें, बेहतर है की आप बेबी सोप का इस्तेमाल करें।
२. हल्के गुनगुने पानी मे थोड़ा सा नमक डालकर उससे दिन मे दो बार रोगग्रस्त हिस्से की सफाई करें। उसके बाद एलो वेरा के गुदा मैश करके उसमे ग्लिसरीन मिलाके फिर त्वचा पर लगायें आधे घन्टे बाद हल्के गुनगुने पानी से साफ कर लें।
३. त्वचा को रूखा ना होने दें, जैतुन का तेल लगायें (मेरी पसन्द) अथवा कैलेन्डुला क्रीम ग्लिसरीन की साथ मिलाकर लगायें।
४. खाने पीने का ध्यान रखें, मिर्च मसालो से परहेज और सादा भोजन, यूँ तो गर्मी मे सादा भोजन ही सभी के लिये अच्छा होता है।
५. मौसमी फल जैसे की खीरा, ककड़ी, तरबुज, खरबुज इत्यादि का सेवन जितना हो सके उतना करें।
६. कच्चे नमक का सेवन कम से कम करें।
७. किशमिश, छुआरे का सेवन करें।
८. रोज सुबह एक चम्मच एलोवेरा के गुदा को निकालें और उसे गरम पानी मे घोलकर छान लें फिर इसे पी जायें, खाले पेट। यह जरूर करें।
९. कब्ज हो तो उसका भी उपाय करें।

सामान्य तरह की गर्मी के दिनो मे होने वाली एलर्जी, खुज़ली, दाद के लिये यह था सामान्य उपाय इन्हे अपनायें, आपको अच्छा लगेगा।
अब गंभीर मसला हो तो
८. मेडिटेशन पर स्कीन एलर्जी सीख लें और उसे नियमित करें
९. औरा चेक-अप करायें, और हील करवायें
१०. अपने औरा के मुताबिक कृस्टल पहनें।
११. एक्युप्रेशर या सुजोक और सीड थेरेपी को अपनायें।

इतना सब करिये जरूर फायदा होगा... फिर आप भी मेरी तरह गर्मी का स्वागत करेंगे मीठे मीठे आम और मौसमी फलो के बहार को चखने के लिये।

May 05, 2009

मेदोदोष(Obesity)मे योगत्रयम ।

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योग न० १---- बेल, अरणी, सोनापाठा, गम्भारी, और पाढल इन पाँचो की जड की त्वचा का काढा बनाकर शहद मे मिलाकर सभी प्रकार के मेदोविकार नष्ट होते है ।
योग न० २---त्रिफ़ला का काडा बनाकर शहद मिलाकर पीने से सभी प्रकार के मेदोदोष नष्ट होते है ।

योग न० ३---पानी को गरम करके ठन्डा होने पर शहद मिलाकर पीने से भी सभी प्रकार के मेदोविकार नष्ट होते है ।

विशेष-- शहद काढे का चतुर्थांश लेना चाहिये, २० ग्राम औषधि को ३२० ग्रा. पानी मे जब तक धीमी आँच पर गरम कर जब तक की वो आधा नही रह जाता । प्रात: काल काढे का सेवन करें। (शा. सं,म,ख,२)

May 02, 2009

दाद पर विचित्र चुटकला , yeast infection, fungal infection of skin

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दाद अपनी प्रकृति से ही जिद्दि होता है , समय पर चिकित्सा न करने पर यह चिरस्थाई रहने वाला रोग होता है खासकर गुह्यय अंगो के और गर्दन पर होने वाला दाद । पुराना होने पर भले ही आप कितनी हि एंटी फ़ंगल क्रीम लगाले पर कुछ दिनो बाद फ़िर अपने रुप मे आ जाता है ।
                  यदि आपको कोई पुराना दाद या उस जैसा कोई इन्फ़ेक्सन है तो आप निम्न बातों का ध्यान रखें----
 
     १) सामान्य नहाने वाली साबुन, शैम्पु, आदि केमिकल का प्रयोग बन्द कर दे ! नहाने के लिये केवल गिलिसिरिन सोप का प्रयोग कर सकते है
    २)यदि आप कोई एटी फ़ंगल क्रीम लगा रहे है तो आप उसे लगातार लगाएं, ऐसा मत करे कि  १-२ दिन लगाई और कुछ ठीक होने पर फ़िर छोड दी ! इससे दाद और भी जिद्दि हो जाता है
   ३) नहाने के बाद नारियल का तैल लगाएं।
    ४)  पहनने वाले कपडे अच्छी तरह धुले हुए और सुखे हुए होने चाहिये , मेरा कहने का अभिप्राय यह है कि  उनमे डिटर्जण्ट का मामुली सा अंश भी नही रहना चाहिये।
      


 ये मामुली सी बाते आपको विभिन्न त्वक विकारों से बचा सकती है ।
   अब जिद्दि दाद के लिये कुछ आयुर्वेदिक योग--
  पकने वाले दाद के लिये-  त्रिफ़ला को तवे पर एक  जला ले (  त्रिफ़ला को तवे पर रख कर  उस पर कटोरी उलटी कर के रख दे ताकि धुवां त्रिफ़ला की भस्म मे ही रम जाए) फ़िर उसमे कुछ फ़िटकरी मिला कर  और वनस्पतिक घी, कुछ देसी घी, सरसो का तैल, और  कुछ पानी  , सबकी समान मात्रा होनी चाहिये , इन सब को मिलाकर इनको खरल मे अच्छी तरह मर्दन  करे , और मलहम बना ले । बस आपकी क्रीम तैयार ,  पकने वाले और स्राव युक्त दादों पर इसे लगाए ।
जिद्दि और रुखे दाद के लिये------
पलाश के बीज, मुर्दाशंख, सफ़ेदा,  कबीला, मैनशिल,  और माजु फ़ल  इनका चुर्ण समान मात्रा मे,  करन्ज के पत्तों का रस, निम्बु क रस, इनसे भावना देकर सारा दिन मर्दन करें । बस औषधि तैयार है । इन सब की गोली बनाकर सुखा ले और गुलाब जल के साथ घीस कर प्रभावित स्थान पर लगाले ।

April 29, 2009

कमर दर्द , कटि शूल

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आदरणीय डाक्टर साहब,मेरी उम्र ३५ साल है !मैं पिछले कुछ वर्षों से कमर दर्द से पीड़ित हूँ!विशेषत सोते समय पूरा शरीर पत्थर की तरह कठोर हो जाता है,करवट भी नहीं बदली जा सकती!पीठ गरम भी रहती है..!यदि कोई उपचार हो तो अवगत कराएँ....धन्यवाद!-रजनीश परिहार,बीकानेर..
    
          रजनीश जी सबसे पहले तो आप वात प्रपोकप आहर विहार जैसे कि  चावल लस्सी ठन्डे पेय पेय पदार्थ अर्जीर्ण मे भोजन करना, बार बार खाना, सामने कि हवा का सेवन, लगातार एक हि सिथिति मे बैठे रहना, देर रात तक जागरण करना, ठन्डे पानी से स्नान करना ,झुककर कार्य करना ,  आदि से परहेज रखें।
           आयुर्वेदिक औषधियों मे निम्नलिखित योग को करें---
 
वृहद वात चिन्तामणि रस -१२५ मि. ग्रा.
योगराज गुग्गुलु-            ४०० मि. ग्रा.
अश्वगन्धा चुर्ण-             आधा चमच ।
सुबह शाम दुध के साथ या  कोष्ण जल के साथ ।
     

रात को एरण्ड तैल दुध मे डालकर पीना (  मात्रा १ चमच से बडाकर आवश्यकता अनुसार इतनी बढा ले जिससे सुबह हल्का सा दस्त लगे)
२१ दिनो तक इस योग को ले ।
      आहार मे -- खसखस का हलुवा बनाकर दिन मे एक बार अवश्य ग्रहण करें।
  विहार मे-  ऐसे व्ययाम करे जिससे कमर के मेरु द्ण्ढ का प्रसारण हो , ।

April 28, 2009

पुरुषत्व वृदि के लिये

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आहार मे दुध का प्रयोग , उडद का प्रयोग, नये देसी घी का सेवन, नये अन्नॊ का सेवन, साठी चावल दुध के साथ सेवन, सुखे मेवे, खजुर , मुन्नका, सिंघडा, मधु, मक्खन, मिश्रि, आदि आहार वीर्य वर्धक होते है ।

       अमिष भोजोनो मे ताजा मांस, पक्षियों के अण्डों का सेवन, वन्य चटक पक्षि का मांस, मगर के अण्डे या मांस का सेवन  वीर्य वर्धक होता है ।
           
            आयुर्वेदिक औषोधियों मे , अश्वगन्धा लेह, शतावरी घृत, कामदेव चुर्ण, धातु पौष्टिक चुर्ण, क्रोंच पाक , मुसली पाक, आदि बहुत ही उपयोगी होते है । जिनकॊ प्राय: अवसाद की स्थिति बनी रहती है उनके लिये इन आहार और औषधियों का सेवन बहुत ही हितकर होताहै ।
     देसी गाय का दुध सदा ही हितकर होता है और मानसिक रोगों को जड से खत्म करता है

April 21, 2009

कुमारी , ग्वारपाठा, घृतकुमारी (Alove vera)

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घीकुवांर मुख्य रुप से कफ़ पित्त शामक होताहै । यह शीत, स्निग्ध, पिच्छिल, गुरु, रस मे कटु,   विपाक मे  मे भी कटु, और वीर्य शीत होता है ,  इसके रस के घन को एलुआ य मुस्स्ब्बर कहते है और यह ऊष्ण होता है ।

आधुनिक औषधि वर्गीकरण मे इसे पित्तविरेचन वर्ग मे रक्खा गया है । इसकी मुख्य क्रिया वृहदाआन्त्र पर होती है जिससे इसकी पेशीयों का प्रबल संकोच होकर इसकी पेरीस्टालिक मुमैंट बढ जाती है । इस तरह से यह कब्ज मे मुख्य रुप से काम करता है ।
कुल मिलाकर यह अपान वायु पर कार्य करता है
आचार्य भावमिश्र ने इसके ये गुण , दोषकर्म बताएं है ----भेदनी -- यानि रुके हुए मल का भेदन करने वाली
  २ शीत
 ३. तिक्त
  ४ नेत्रॊं के लिये हितकर
 ५. रसायन ( बुढापे को रोकने वाली और व्याधिक्षम्त्व बढाने वाली)
 ६बृंहणीय ( शरीर को मोटा करने वाली)
वृष्य,  बल्य, वातशामक, विषनाशक,  गुल्म ( बाय का गोला), प्लीहारोग, यकृत विकार,  कफ़रोग नाशक,  ज्वरहर, ग्रन्थि नाशक( टुमर, सीस्ट,) नाशक, जले हुए मे लाभकारी, त्वचा के लिये हितकर,पैतिक और रक्त्ज रोगों का नाशक।

 इसका घन यानि एलुआ मुख्य रुप से आर्तवजनन होता है ।

अब सवाल आता है कि इसका प्रयोग कैसे करे या किस रुप मे करे? आपके पास दो विक्ल्प है , एक एलोव वेरा जूस और अन्य  आयुर्वेदिक शास्त्रिय योग जैसे कि कुमार्यासव । आईए इनका तुलनात्मक अध्ययन करके देखेते है ।
एलोव वेरा जूस मे सिर्फ़ एक घटक यानि ग्वारपाठा होता है , जिसमे कम्पनिया इसको सुरक्षित रखने के लिये विभिन्न प्रकार के प्रिजर्वेटिव  केमिकल डालती है जैसे की - सिट्रीक एसिड , सोडियम बेन्जोएट, आदि आदि,।

अब  ऋषिमुनियों द्वारा वर्णित योग यानि कुमार्यासव का अध्ययन करते है ---
 मुख्य द्रव्य- ग्वारपाठे का रस
  २ शहद, ३, लोह्भस्म,४,पुरानागुड,
 मुख्य  प्रेक्षप द्रव्य---
  हल्दी, अकरकरा, त्रिफ़ला, त्रिकटु, नागकेशर, पिप्प्लीमूल, मुलेठी, पुष्करमूल, गोखरु,केवांच के बीज, उटंगन के बीज,  पुनर्नवा,  लोंग, इलायची, देवदारु आदि( शा० सं०)
कल्पना-- सन्धान कल्पना ( कुदरती एल्कोहाल )
जैसा कि पहले बताया है  मुख्य रुप से ग्वारपाठा कफ़पित्त शामक होताहै  यानि यदि लगातार इस को अकेले हि प्रयोग करते है तो यह शरीर मे दोषों को असाम्य कर सकता है । एलोव वेरा जुस मे  केमिकल भी होते है यह भी सोचीये  ..........?

लेकिन  कुमार्यासव मे कोई केमिकल नही होता और न ही सिर्फ़ एक ही द्रव्य , ग्वार पाठे के विपरित प्रभाव को दुर करने के लिये इसमे अन्य द्रव्य बहुत है ।
अत: मेरे विचार मे  एलोव वेरा जुस की आपेक्षा कुमार्यासव लेना हितकर है ।

 


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