रविवार, १५ अगस्त २०१०

आजादी

आजादी की ६३वीं वर्षगांठ पर आपको हार्दिक शुभकामनांए।

क्या याद हैं
वो बलिदान की कहानी
मां की आंख का पानी
विधवा जवानी
बाप
नहीं था
जिसकी आंख में पानी
जिससे हुईं नसीब
ये आजाद जिंदगानी
क्या याद है
वो बलिदान.............।

बृहस्पतिवार, ८ जुलाई २०१०

साहब का कुत्ता

उस दिन
उसने 
मुझसे कहा कि
मैं कुत्ता बनना चाहता हूं
वही कुत्ता
बेबी की गोद में
बैठा दुम हिलाता है
गाड़ी में घूमने जाता है
दूध और बिस्किट का
नाश्ता पाता है
गली का नहीं
साहब का कुत्ता
कहलाता है।

शनिवार, १९ जून २०१०

प्रीत

मेरे मीत
मेरे तन में
बसे मन से
तुम्हारी प्रीत
कुछ ऎसी 
होती है प्रतीत
जैसे तम से भरे
मेरे मन में
जला कर रख दिया हो
किसी ने कोई दीप
वैसे भी
मेरे मन पर 
तुम्हारी जीत
कुछ ऎसी ही है
जैसे हो कोई
जगत की रीत
या फिर
गहरी अंधेरी रात के बाद
नव-प्रभात
जैसे फूल में सुगंध
मेहंदी में लाल रंग
मधु में मकरंद
कुछ इसी तरह हो
तुम मेरे संग-संग॥

मंगलवार, १५ जून २०१०

अपनी अहमियत है

जिन्दगी में प्यार की
बसंत में बहार की
गीता के सार की
अपनी अहमियत है |


बागों में फूलों की
मेले में झूलों की
जीवन में उसूलों की
अपनी अहमियत है |


तरकश में तीर की
भोजन में खीर की
तरलों में नीर की
अपनी अहमियत है |


युद्ध में वीरों की
गणित में जीरो की
फ़िल्म में हीरो की 
अपनी अहमियत है |


दिनों में इतवार की
दोस्ती में  ऐतबार की
काव्य में अलंकार की
अपनी अहमियत है |


जेवरों में शाइन की
पार्टी में वाइन की
जंगल में लायन की
अपनी अहमियत है |


फूलों में गुलाब की
रातों में ख्वाब की
दफ्तर में साहब की
अपनी अहमियत है |


रसों में श्रृंगार का
आभूषणों में हार का
मुंह में लार की
अपनी अहमियत है |


त्योहारों में दीवाली की
शहरों में बरेली की
मकानों में हवेली की
अपनी अहमियत है |


मेरे लिए आपकी
हर पल साथ की
दिल की बात की
अपनी अहमियत है ||

शनिवार, ५ जून २०१०

समस्या

उस दिन
अचानक
नेता जी ने
अपने सहयोगियों की
एक सभा बुलायी
उनके सामने
अपनी समस्या बतायी
वे बोले,
दोस्तो मेरे साथ
धोखा हुआ है
एक दलाल ने
भर्ती का
मेरा हिस्सा
मार लिया है
अब तुम ही बताओ
उसका
क्या हाल किया जाए
मार दिया जाए
कि छोड़ जाए।

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